शनिवार, 19 अगस्त 2017

वर्षा सुन्दरी का रूठने की महिमा

अप्रैल में वर्षा सुन्दरी के प्रथम आगमन की  महिमा के बारे में लिखा था लेकिन पूरी मई और जून वर्षासुन्दरी के रुठने से खून के आँसू रोता रहा। मानसून बहुत देर से पहुँचा और वर्षा के इन्तजार में सजाये गये खेत रूपी थाल सूखे ही रह गये। सरकार सूखे की आशंका में सूखकर काँटा होने लगी और देश की अर्थव्यवस्था जलने लगी।
दिल से निकलगी, ना मरकर भी, वतन की उल्फत मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आयेगी....।

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