शनिवार, 19 अगस्त 2017

बाढ़ का कहर

बाढ़ में  डूबा हुआ प्राथमिक विद्यालय
समस्त उत्तर भारत में पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से हिमालय से निकलकर उत्तर के मैदान में बहने वाली नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जगह-जगह तेज बहाव के कारण टूट चुके तटबन्धों से बह रहे पानी ने हजारों गाँवों को समंदर बना दिया है। जिधर देखिये उधर पानी ही पानी नजर आ रहा है। गोरखपुर-बस्ती मंडल के दर्जनों जिले बाढ़ की कहर से सहमे हुये हैं और हजारों जिंदगियाँ दूसरों की कृपा की मोहताज हो गई हैं।
क्या मूसलाधार बारिश बाढ़ की असली वजह है?
कायदे से कहा जाय तो कतई नहीं। बाढ़ की असली वजह बारिश नहीं बहुत हद तक प्रशासन की लापरवाही है। हालाँकि हर साल की तुलना में बारिश इस बार कुछ दिनों के अंतराल में ज्यादा हुई लेकिन इतने बड़े स्तर पर बाढ़ लाने में मात्र इसकी भूमिका को ही रेखांकित नहीं किया जा सकता है। असल में बाढ़ का कहर नदियों के किनारे वाले क्षेत्रों में ज्यादा दिखाई दे रहा है जिसकी वजह है बंधों का टूटना। नेपाल के पहाड़ी इलाकों से बारिश का पानी नदियों के जरिये उ.प्र. के तराई जिलों जैसे-महराजगंज, सिदधार्थनगर इत्यादि जिलों मे आता है। अचानक हुई आशा के विपरीत ज्यादा बारिश ने नदियों के किनारों पर दबाव बनाया और सालों से कमजोर बन्धे एक-एक कर टूटते गये। 

महराजगंज में बाढ़ की स्थिति-
बाढ़ में डूबी हुई सड़क
महराजगंज जनपद के वे इलाके जो नदियों के किनारे वाले हिस्से में पड़ते हैं वहाँ बाढ़ की विभिषिका ज्यादा देखने को मिल रही है। जनपद के फरेंदा, पनियरा, धानी, नौतनवा, ठूठीबारी इत्यादि क्षेत्रों में बाढ़ अपने चरम स्थिति पर है। सैकड़ों गाँव जलमग्न हैं और उनको राहत पहुँचाने में प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। रोहिन नदी के आसपास का इलाका पूरी तरह पानी में डूब गया है और गाँव टापू की तरह दिखाई दे रहे हैं। महराजगंज का एकमात्र इंजीनियरिंग कालेज, आई टी एम पूरी तरह से पानी में  डूब गया है। कई लोंगे की मृत्यु हो चुकी है और सैकड़ों मवेशी लापता हैं। महराजगंज-फरेंदा मार्ग, ठूठीबारी-निचलौल-मार्ग, महराजगंज-पनियरा मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप है। जिलाधिकारी के आदेश पर जनपद के समस्त स्कूल, कालेज 20 अगस्त तक बन्द कर दिये गये हैं।

नगर पालिका की हालत बुरी-

मूसलाधार बारिश की वजह से महराजगंज नगर पालिका की हालत पूरी तरह से खस्ता हो गई है। पानी की उचित निकासी न होने की वजह से कई मुहल्ले पूरी तरह से पानी में डूब चुके हैं। मुख्य सड़कें चलने लायक नहीं हैं और दुकानों में पानी घुँस गया है। व्यापार पूरी तरह से ठप  है।

बाढ़ के बाद बीमारी-

समस्या आगे और भी भयंकर होगी जब पानी उतरने के बाद बाढ़ग्रस्त इलाकों में संक्रामक और मच्छर जनित बीमारियों का प्रकोप बढेगा। प्रशासन को इसका सामना करने के लिये अभी से तैयार होना पड़ेगा क्योंकि आने वाले समय में बीमारियाँ महामारी की तरह फैलेंगी। 


दस्तक सुरेन्द्र पटेल
निदेशक
माइलस्टोन हेरिटेज स्कूल लर्निंग विद सेन्स-एजुकेशन विद डिफरेन्स

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नारी का नारकीय जीवन: कारण

सभ्यता के आदिकाल से ही नारी को दोयम दर्जे का नागरिक मााना जाता रहा है। नाना प्रकार के विकास के बावजूद आज इक्कीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में भी...