मंगलवार, 28 अगस्त 2012

आजम खाँ और नेताओं की भाषा


          हमारे काबिल नेताओं की भाषा और उनका टेंपरामेंट कितना कमाल का है इसकी बानगी मिली लखनऊ में विधानभवन स्थित तिलक हाल में जहाँ पर नगर विकास मंत्री आजम खान ने दो दिवसीय समीक्षा बैठकें रखी थीं। बैठक के तय समय पर कई सारे अफसर नदारद थे जिनके बारे में एक वरिष्ठ पी.सी.एस स्वरूप मिश्र द्वारा पूछने पर माननीय मंत्री जी इतने आगबबूला हो गये कि उन्होने पहले तो पी.सी.एस. आफिसर को चुप बैठिये कहा। बाद में यह, बकवास करते हो...तक पहुँचा और अंत हुआ...बदतमीज कहीं का...के साथ।
            सवाल यह उठता है मंत्री महोदय लोग अपने आपको समझते क्या हैं, क्या वे आसमान से उतरे फरिश्ते हैं जिनसे कोई सवाल नहीं पूछा जा सकता। अगर एक वरिष्ठ पी.सी.एस. के साथ इस तरह का बर्ताव किया जाता है तो एक आम आदमी की इन महानुभावों के सामने औकात ही क्या। जनता को तो ये कीड़े-मकोड़े से ज्यादा की तवज्जो नहीं देते होंगे। 



दिल से निकलगी, ना मरकर भी, वतन की उल्फत मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आयेगी....।

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