सोमवार, 11 अप्रैल 2011

हिंन्दुस्तान और उसकी गलतियाँ-2

अभी सुबह ही मैने हिन्दुस्तान अखबार की खबरों के बारे में लिखा था। आज दोपहर में मैं अपने दोस्त अमित के घर गया था। मैंने उसे आज की खबर के बारे में बताया क्योंकि उसके घर भी हिन्दुस्तान ही आता है। जब मैंने अखबार उठाया तो चकरा गया क्योंकि उसमें वो खबर ही नही थी जिसके बारे में मैने लिखा था। यहाँ तक और सारे मैटर भी अलग थे। सबसे बड़ी बात कि अन्ना हजारे की जिस समिति के बारे में रामदेव ने भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया था वह भी उसमें से गायब था। उस अखबार में खबर थी हजारे के पहल से मामला सुलझ गया। मैंने अमित से पूछा कि क्या यह आज का अखबार है, उसने कहा हाँ। मैने सोचा कि क्या दिखाने के लिये अखबार उठाया और क्या दिख गया।


हुआ यूँ था कि अमित के घर जो अखबार था वह गोरखपुर संस्करण था, क्योंकि अमित रोज सुबह गोरखपुर से घर आता है और शाम को फिर गोरखपुर चला जाता है।

मैने सुविधा के लिये दोनों अखबारों को स्कैन करके लगाया है। अभी तक मैं खबरों में गलतियों के बारे में बात कर रहा था पर अभी एक नया मामला है और वह है-दो संस्करणों में खबरों के अंतर का। स्थानीय खबरों में विभिन्नता तो समझ में आती है लेकिन मुख्य पृष्ठ ही अलग-अलग, कुछ अजीब है। महराजगंज संस्करण में निकला है कि अन्ना हजारे द्वारा जन लोकपाल समिति में पिता-पुत्र को लेने पर रामदेव ने आपत्ति की और हजारे पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया। वही गोरखपुर संस्करण में खबर है कि अन्ना के पहल से मामला सुलझ गया और रामदेव ने आरोप लगाया कि उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया। रामदेव की भी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षायें हैं जिसके बदौलत वह भी किसी न किसी तरह खबरों में बने रहना चाहते हैं। फिलहाल हमारी बातचीत का मुद्दा यह नही है। मैं यह कहना चाहता हूँ कि दो आसपास के जिलों में खबरों के स्तर में इस तरह का बर्ताव नही होना चाहिये। यकीनन महराजगंज का खबरों को प्राप्त करने की महत्ता एवं अधिकार को हिन्दुस्तान का यह रवैया दोयम दर्जे का ही दर्शा रहा है कि एक ही दिन दो तरह की खबरें निकल रही हैं और महराजगंज को एक दिन पीछे की खबरें मिल रही हैं। यही हाल है तो बहुत सारी खबरें महराजगंज संस्करण को मिल ही नही पाती होंगी क्योंकि ऐसा इसलिये होता है कि महराजगंज संस्करण पहले ही छप जाता होगा जिसकी वजह से उसकी खबरों को अपडेट नही किया जाता होगा।

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