शुक्रवार, 15 मई 2020

राजा, दूध का तालाब और प्रजा की आज के समय में प्रासंगिकता

मैं आप लोगों को एक कहानी सुनाता हूँ जिसे मैं आमतौर पर अपने विद्यार्थियों को सुनाता हूँ....। बात पुरानी है, जब राजा लोग हुआ करते थे। उनकी प्रजा होती थी। प्रजा को उनका हुक्म मानना पड़ता था। राजा को अक्सर यह बात सालती रहती थी कि वह कोई ऐसा कार्य करे जिससे उसका नाम अमर हो जाये। क्या करे, ऐसी मंत्रणा उसने अपने मंत्रियों से की। मंत्रियों ने रास्ता सुझाया। उन्होने कहा कि महाराज को एक ऐसा तालाब बनवाना चाहिये जो दूध से भरा हो। इस प्रकार का तालाब न देखा गया है न सुना गया है। यकीनन राजा का नाम विश्व भर में प्रसिद्ध हो जायेगा। राजा को बात अच्छी लगी। अगले ही दिन पूरे प्रजा में फरमान सुना दिया गया कि राजा एक ऐसे तालाब का निर्माण करवा रहे हैं जो दूध से भरा होगा। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अमुक दिन को सारी प्रजा को एक लोटा दूध लाकर तालाब में डालना है। इस प्रकार से पूरा तालाब दूध से भर जायेगा। मुनादी करवा दी गयी। निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया। वह दिन भी पास आ गया जब तालाब में एक लोटा दूध डालना था। निर्धारित दिन के पहले एक अहीर जो राजा के राज्य में रहता था और जिसकी विशाल गोशाला थी। वह दूध के व्यापार से काफी धन कमाता था। उसने सोचा कि सभी लोग तो दूध डालेंगे ही, यदि मैं चुपके से प्रातःकाल ही एक लोटा जल डाल दूं तो किसी को क्या पता चलेगा। मेरा एक लोटा दूध नुकसान होने से बज जायेगा। निर्धारित दिन वह प्रातःकाल उठा और सबसे पहले (अपने समझ से) तालाब में एक लोटा जल डाल आया। दिन में जब राजा तालाब का निरीक्षण करने आया तो उसने क्या देखा। पूरा तालाब जल से भरा था...।दूध की एक बूंद भीं कहीं नहीं दिखाई दे रही थी।
कहानी का वर्तमान संदर्भ बहुत प्रासंगिक है। विद्यालय प्रबंध तंत्र, आनलाइन क्लासेज और अभिभावक..बाकी आप खुद समझदार हैं।
दस्तक सुरेन्द्र पटेल 

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