बुधवार, 8 मई 2013

पुरानी शराब है आई पी एल


एक कहावत है कि शराब जितनी पुरानी होती है उसकी खुमारी उतनी ही ज्यादा मदहोश करने वाली होती है। उसका नशा धीरे-धीरे चढ़ता है और देर से उतरता है। यही हाल आई पी एल का भी है। जैसे जैसे आई पी एल पुराना होता जा रहा है उसका नशा लोगों के सिर पर और ज्यादा चढ़ रहा है।

बी सी सी आई द्वारा 2008 में शुरु किया गया इण्डियन प्रीमियर लीग सफलता और कीर्तिमानों की इन ऊँचाइयों को छुयेगा किसी ने सोचा नहीं था। 2013 में लागातार छठवीं बार आयोजित हो रहा आई पी एल निश्चित ही 2008 से ज्यादा सफलतापूर्वक आयोजित किया जा रहा है और बल्ले और गेंद की जंग का दर्शक खूब मजा ले रहे हैं। क्रिकेट की इस नई परिभाषा से पारंपरिक खेल का रोना रोने वाले क्रिकेटर और आलोचक भौंचक है। लेकिन जिस प्रकार फिल्मे, आलोचक या फिर निर्देशक निर्माता नहीं बल्कि दर्शक चलाते या डुबातें है, उसी प्रकार क्रिकेट का भविष्य आजकल दर्शक ही तय कर रहे हैं। पारंपरिक खेल से लोगों का नाता टूट रहा है और लोग रोमांच की पराकाष्ठा की ओर भाग रहे हैं।


डर्टी पिक्चर में विद्या बालन द्वारा बोला गया डायलाग कि, फिल्मे सिर्फ तीन चीजों से चलती है- इण्टरटेनमेन्ट, इण्टरटेनमेन्ट और इण्टरटेनमेन्ट। उसी प्रकार क्रिकेट भी आजकल सिर्फ तीन चीजों की वजह से देखा जाता है- इण्टरटेनमेन्ट, इण्टरटेनमेन्ट और इण्टरटेनमेन्ट। आई पी एल में इण्टरटेनमेन्ट है, रोमांच का तड़का है, चीयर लीडर्स की रिझाने वाली अदायें हैं। दर्शकों को इससे ज्यादा और क्या चाहिये। भागदौड़ भरी जिन्दगी में कुछ घण्टे वे अपनी परेशानियों को भूलकर ग्लेडियेटर्स की तरह लड़ रहे क्रिकेटरों को देखकर अपना मन बहला लेते हैं तो क्या बुरा है। 





दिल से निकलेगी ना मरकर  भी, वतन की उल्फत
मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आयेगी।।

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