सोमवार, 13 अगस्त 2012

सुशील कुमार


वर्तमान भारतीय कुश्ती के सरताज सुशील कुमार का जन्म 26 मई 1983 को बपरोला, दिल्ली में हुआ। सुशील के पिता दीवान सिंह डी टी सी में बस ड्राइवर थे और माता कमला देवी एक सामान्य गृहिणी थीं। सुशील को कुश्ती की प्रेरणा अपने चचेरे भाई संदीप और चाचा जी से मिली जो खुद एक पहलवान थे। संदीप ने सुशील के लिये अपने कुश्ती करियर को तिलांजलि दे दी क्योंकि एक मध्यमवर्गीय परिवार उस समय एक ही बच्चे को कुश्ती के लिये आवश्यक संसाधन मुहैया करा सकता था।

कुमार ने अपने कुश्ती का प्रशिक्षण छत्रसाल अखाड़ा से चौदह साल की उम्र में पहलवान यशवीर और रामफल के निर्देशन में शुरू किया। बाद में उन्होने अर्जुन पुरस्कार प्राप्त पहलवान सतपाल और रेलवे के कोच ज्ञान सिंह से भी प्रशिक्षण लिया। शुरुआती दौर में सुशील को काफी परेशानियों से दो चार होना पड़ा, जिसमें बिछाने के लिये बिस्तर और सोने के लिये अन्य प्रशिक्षुओं के साथ कमरा बाँटना भी था।


सुशील का करियर-
पहली सफलता सुशील को तब मिली जब उन्होने वर्ल्ड कैडेट गेम 1998 में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उन्होने एशियाई जूनियर कुश्ती प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक सन् में जीता।  जूनियर प्रतियोगिताओं में अपनी विजय पताका फहराने के बाद सुशील ने एशियाई कुश्ती प्रतियोगिता में कांस्य पदक और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता। 2003 में विश्व कुश्ती चैंपियन के मुकाबले में सुशील कुमार चौथे स्थान पर रहे थे। 2004 के एंथेंस ओलंपिक में वह चौदहवें स्थान पर रहे थे।  विजय के उनके सुनहरे सफर की शुरुआत 2005 के राष्ट्रमंडल खेलों से हुई जब उन्होने स्वर्ण पदक जीता। 2007 के राष्ट्रमंडल खेलों में भी उन्होने स्वर्ण पदक जीता।  2007 में हुए विश्व चैंपियनशिप में वो सातवें स्थान पर रहे और उसके बाद 2008 के बीजिंग ओलंपिक में उन्होने कांस्य पदक जीता।  ओलंपिक में अपने पदकों की संख्या बढ़ाते हुये 2012 के लंदन ओलंपिक में उन्होने रजत पदक जीता। हम आशा करते हैं कि सुशील कुमार 2016 में होने वाले ओलंपिक जिनका आयोजन रियो डि जेनेरियो में होने वाला है, वह स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम अवश्य ही रोशन करेंगे।
सुशील कुमार के लिये हर भारतवासी की तरफ से दिल से शुभकामनायें।


दिल से निकलगी, ना मरकर भी, वतन की उल्फत मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आयेगी....।

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