शनिवार, 20 जून 2020

सुशांत सिंह-लूजर का टैग हम खुद लगाते हैं.......


Sushant Singh Rajput Death When He Removed His Surname Rajput ...
दस्तक सुरेन्द्र पटेल
बीते 14 जून को हिन्दी फिल्म उद्योग के अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या कर ली। उनकी आत्महत्या ने फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि राजनीति, साहित्य, कला इत्यादि क्षेत्रों के साथ-साथ आम जनमानस को भी झकझोर दिया। चर्चा का विषय यही था कि सुशांत जैसा प्रसन्नचित्त दिखने वाला अभिनेता जिसकी कामयाब कहानी कहने के लिये उनकी फिल्मों की सफलता ही काफी थीं, उसने ऐसा कदम क्यों उठाया। देश के प्रधानमंत्री से लेकर सभी लोगों ने उनकी मौत पर शोक जताया। 
सवाल उठता है कि सुशांत ने आत्महत्या क्यों की। कई तरह की कहानियाँ तैर रही हैं। कोई फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों पर सवाल उठा रहा है। कोई उनके व्यक्तिगत जीवन पर उंगली उठा रहा है। कोई उनके कमजोर होने पर सवाल खड़े कर रहा है। 
एक व्यक्ति जो खुद को खत्म करने जैसा खौफनाख कदम उठाने जा रहा है उसके दिलोदिमाग में क्या चल रहा है, कोई इसकी कल्पना तक नहीं कर सकता। पशु-पक्षियों को भी अपने जीवन से प्रेम होता है। किसी ने नहीं सुना होगा कि किसी जानवर ने आत्महत्या की होगी। सिर्फ इंसान आत्महत्या करता है, क्यों। 
क्योंकि वह अपने नहीं बल्कि दूसरे के नजरिये से अपना जीवन जीता है। उसकी सफलता औऱ असफलता दूसरों के पैमाने की मोहताज होती है। उसकी खुशी रूई के उस गट्ठर की भाँति हो जाती है जो जितना ज्यादा गीली होती है उसका वजन उतना ही ज्यादा हो जाता है। 
सुशांत सिहं पहले अभिनेता या अभिनेत्री नहीं है जिसने आत्महत्या की हो। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की फेहरिस्त काफी लंभी है जिन्होने आत्महत्या की है। 
अभिनेता जिन्होने आत्महत्या की-
https://en.wikipedia.org/wiki/Category:Indian_male_actors_who_committed_suicide
1-गुरूदत्त 
2-संतोष जोगी
3-नितीन कपूर
4-उदय किरन
5-कुणाल सिंह
6-साईं प्रशान्त
7-कौशल पंजाबी
8-रंगनाथ
9-श्रीनाथ
इनके अलावा 17 अभिनेत्रियाँ है जिन्होने आत्महत्या की है।
https://en.wikipedia.org/wiki/Category:Indian_actresses_who_committed_suicide

आत्महत्या को किसी भी सूरत में जस्टिफाई नहीं किया जा सकता। कानून भी इसे अपराध की श्रेणी में रखता है जिसमें सजा का भी प्रावधान है। लेकिन फिर भी लोग आत्महत्या कर रहे हैं तो इस पर बहस होनी चाहिये। गरीब, कर्ज में डूबा हुआ व्यक्ति, व्यवसाय में घाटा होने पर बर्बाद हुआ व्यवसायी इत्यादि आत्महत्या करते हैं तो कहा जाता है कि उसने जीवन से परेशान होकर ऐसा किया। किसानों की आत्महत्या पर तो बाकायदा राजनीति भी होती रही है। किसानों की आत्महत्या विषय पर एक व्यंग फिल्म भी बन चुकी है जिसका नाम पीपली लाइव था।
लेकिन एक सफल अभिनेता जिसकी फिल्मों ने अच्छी कमाई की हो, जिसके पास पैसा हो, जो अच्छी जिंदगी जी रहा हो, वह ऐसा करे तो दाल में कुछ काला जैसा प्रतीत होता है।
सुशांत की पिछली फिल्म छिछोरे थी। यह फिल्म इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में असफल हो जाने वाले एक ऐसे लड़के की आत्महत्या की कोशिश करने की घटना के इर्द गिर्द घूमती है जिसके   माता-पिता दोनो इंजीनियर हैं। पिता अपने लड़के को जिंदगी जीने की प्रेरणा देता है। उसका लड़का लूजर होने का दबाव न झेल पाने की वजह से टैरेस से कूद जाता है। पिता उसे अपने और अपने दोस्तों के जीवन से तमाम ऐसे उदाहरण देता है जिसमें उन लोगों ने कई बार असफलता का मुँह देखा लेकिन जीवन से कभी हार नहीं मानी और अंततः अपने जीवन में कामयाब हुये।
इस फिल्म में पिता का किरदार सुशांत सिंह ने ही निभाया था। आजकल फिल्म व अभिनेताओं की बड़ी सपाट सी सोच है। वह फिल्म को दर्शकों के लिये मात्र मनोरंजन का साधन मानते हैं। अपने आपको सिर्फ एक किरदार जिसका काम लेखक के लिखे चरित्र को मात्र परदे पर उतार देना है। कैमरे के पीछे उनका जीवन अदा किये गये किरदारों के मेहनताने के रूप में प्राप्त की गई रकम को खर्च करने तक ही सीमित है। कुछ सयाने अभिनेता उस रकम को बिजनेस में लगाते हैं और बाद की जिंदगी के लिये रखते हैं। अभिनेताओं का किरदार से कोई जुडाव ही नहीं है। किसी को कोई परवाह नही है। कोई अपनी जिम्मेदारी नहीं समझना चाहता। हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री और साउथ फिल्म इंडस्ट्री में यह मूलभूत अंतर है। 
क्रमशः.....

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