सोमवार, 9 जनवरी 2012

भोजन का अधिकार दिलायेंगे- राहुल गाँधी

 उत्तर प्रदेश के चुनावी महासंग्राम में विरोधियों के खेमें मे हुंकार भर रहे राहुल द्वारा मुस्लिम आरक्षण के बाद फेंका गया पासा भोजन की गारंटी का है। देवरिया में चुनावी सभा को संबोधित करते हुये उन्होने कहा कि रोजगार गारण्टी की योजना की भाँति भोजन के अधिकार का कानून बनाया जायेगा...जाहिर सी बात है कि जब सरकार सत्ता में आयेगी तब।
ध्यान से देखने से पता चलता है कि राहुल गाँधी के द्वारा दिये गये इस बयान में भारतीय जनमानस में व्याप्त आम सोच की झलक मिलती है। आमतौर पर हर नेता वही बोलता है जो जनता सुनना चाहती है।  जिससे सुनकर उसे अच्छा लगता है। अपनी सोच को राहुल जैसे नेता के मुँह से सुनकर जनता फूली नही समाती और एक बार फिर बेवकूफ बन जाती है अगले पाँच वर्षों तक बेवकूफ बने रहने के लिये। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली जनता जो सच्चे मायनों में गरीब है औऱ रोटी का जुगाड़ करने में ही उसका पूरा दिन निकल जाता है, वह रोटी के ऊपर कुछ सोच ही नही सकती । वह उसके जीवन की सबसे बड़ी समस्या और सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा भी, जिसके पूरे होने के बाद उसके पास सोचने और करने के लिये कुछ नही बचता क्योंकि उसे उस लायक बनाया ही नही गया कि वह रोटी से ऊपर कुछ सोच सके।
विज्ञान कहता है कि मनुष्य के विकास के पीछे इसकी महत्वाकांक्षा बहुत बड़ा योगदान है जिसके फलस्वरूप उसे परिस्थितियों से लड़कर प्राप्त करने के साथ साथ उसे धीमे किन्तु मजबूत कदमों से आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिलती है। भारत की दो तिहाई जनता की महत्वाकांक्षा रोटी ही है इसलिये अगर जनता राहुल गाँधी उसकी यह महत्वाकांक्षा पूरी करने का वादा करते हैं तो भारतीय जनता उन्हे वोट क्यों न दे....।
दिल से निकलगी, ना मरकर भी, वतन की उल्फत मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आयेगी....।

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