Friday, May 10, 2013

मनमोहन का नया अवतार...Manmohan the saviour...!


अटल वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान कुछ दिनों के लिये प्याज के दाम 70 से 80 किग्रा हो गये थे। उस साल के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने एक गाने के सहारा लिया था। गाने का तर्ज, तुम तो ठहरे परदेशी, साथ क्या निभाओगे, का था और बोल कुछ इस प्रकार के थे-
का हो अटल चाचा, पियाजुआ अनार हो गईल....
कहना ना होगा कि इस गाने ने पूर्वांचल में  ऐसी धूम मचाई कि भाजपा का पत्ता यूपी से कट गया और आजतक भाजपा अपनी जड़े तलाश कर रही है। दूसरी ओर यूपीए सरकार का दसवाँ साल पूरा होने के लघभग करीब है और दो बार के इस कार्यकाल के दौरान कांग्रेस पर न जाने कितने प्रकार के आरोप लगे, मँहगाई बढ़ी, आतंकवादी हमले हुये, लेकिन न मनमोहन बदले और नही सोनिया गाँधी। अन्ना का तूफान भी यूपीए सरकार को हिला नहीं सका। कैग की रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट का डंडा तक इनका कुछ नहीं बिगाड़ पाये। सीबीआई भी इनके एजेंट की तरह काम करती है।
लेकिन इन सबके बीच जो सबसे बड़ी हैरानी वाली बात है, वो है मनमोहन सिंह का बर्ताव। जिन मनमोहन सिंह को पूरा देश शालीन, शांत और सोनिया गाँधी की हाँ में हाँ मिलाने वाला कहता था वही मनमोहन आज एक ऐसे आदमी की ढाल बनकर खड़े हैं जिसे  सुप्रीम कोर्ट ने भी जलील कर दिया है। जिस आदमी पर सी बी आई की रिपोर्ट में बदलाव कराने का आरोप है। सोनिया गाँधी की नाराजगी के बावजूद अश्विनी कुमार अगर बचे हुये हैं तो सिर्फ मनमोहन सिंह की वजह से।
ये ताकत कहाँ से आई इस पर मंथन करना चाहिये। लेकिन मंथन करने से भी क्या हासिल होगा, सिर्फ मेहनत ही जाया होगी। असल मे सारा खेल आपसी मिलीभगत से हुआ है जिसमें कांग्रेस के नेतृत्व से लेकर पूरा सरकारी तंत्र शामिल है। मनमोहन सिंह की जिद और कवच रूपी अवतार को उनकी प्रवृत्ति समझने की भूल करना बेमानी होगा। असल में दूसरे के कंधे का सहारा लेकर बंदूक चलाना राजतिज्ञों की पुरानी आदत रही है। अश्विनी कुमार जायेंगे तो, मनमोहन पर उंगली उठेगी, और अगर मनमोहन पर उंगली उठी तो सोनिया उसकी जद में आ ही जायेंगी। तो सारा खेल खाने और बचने-बचाने का है।


दिल से निकलगी, ना मरकर भी, वतन की उल्फत मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आयेगी....।

Thursday, May 9, 2013

कांग्रेस की जीत कर्नाटक में


बिल्ली के भाग से छींका टूटा, बिल्ली ने समझा कि उसकी मेहनत रंग लाई, पर उसे पता नहीं था कि वह कितना भी उछल कूद मचा ले, छींके की ऊँचाई तक नहीं पहुँच सकती थी।
कर्नाटक के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद हुई बयानबाजी भी कुछ इसी तरह की है। जिस भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री येदुरप्पा को भ्रष्टाचार के आरोंपों की वजह से अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा हो, इसके साथ ही साथ उन्हे भाजपा से निष्काषित कर दिया गया हो या फिर वे खुद ही निकल गये हों, भाजपा के प्रदर्शन पर इसका प्रभाव नजर आना ही था।  भाजपा से निकलने के बाद जिस तरीके से येदुरप्पा की आँखों में आँसू  झलके थे, कर्नाटक में भाजपा के भविष्य का निर्धारण उसी दिन हो गया था।

हमारी राजनीतिक व्यवस्था की यह सबसे बड़ी कमी है कि हम व्यक्ति के प्रभाव क्षेत्र से कभी निकल ही नहीं पाये। किसी भी राजनीतिक पार्टी पर नजर डालकर देखें, वह पूरी तरह से एक आदमी के ही इर्द गिर्द  घूमती है। क्या पार्टी का प्रदर्शन सिर्फ उसके अध्यक्ष या फिर प्रचारक की वजह से तय होता है, शायद नहीं लेकिन पार्टी का भविष्य और दिशा निर्देश पूरी तरह से व्यक्ति केन्द्रित होता है। कर्नाटक में भाजपा के बुरे प्रदर्शन की यह सबसे बड़ी वजह हो सकती है कि येदुरप्पा के निकलने के बाद भाजपा को उनका कोई विकल्प नही मिला।
हमारे महराजगंज विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी होते थे सुदामा प्रसाद, जो ना जाने कितने सालों से कांग्रेस के टिकट पर विधायक का चुनाव लड़ रहे थे, पर जीत तो दूर, जीत की खुशबू तक नसीब नहीं होती थी उन्हे। इस बार गलती से सपा के उम्मीदवार पर उंगली उठी, पार्टी ने उन्हे टिकट नहीं दिया। इधर कांग्रेस भी अपनी लागातार होती फजीहत से तंग आकर नया दाँव खेलने का मन बनाया और सुदामा प्रसाद को टिकट न देकर उनके कट्टर प्रतिद्वंदी, युवा नेता आलोक प्रसाद को टिकट दिया। चुनाव के नतीजे और सुदामा प्रसाद के भविष्य का निपटारा उशी दिन हो गया, सुदामा प्रसाद की न जाने कितने दशकों के बाद किस्मत खुली और वे विधायक बन गये। सोचने वाली बात थी कि, क्या सुदामा प्रसाद अपनी वजह से चुनाव जीते थे, नही, बिल्ली के भाग से छींका टूटा था, और मलाई उसके हिस्से में आ गई। शायद यही वजह है कि हर बिल्ली का दिन कभी न कभी आता जरूर है।


दिल से निकलगी, ना मरकर भी, वतन की उल्फत मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आयेगी....।

Wednesday, May 8, 2013

पुरानी शराब है आई पी एल


एक कहावत है कि शराब जितनी पुरानी होती है उसकी खुमारी उतनी ही ज्यादा मदहोश करने वाली होती है। उसका नशा धीरे-धीरे चढ़ता है और देर से उतरता है। यही हाल आई पी एल का भी है। जैसे जैसे आई पी एल पुराना होता जा रहा है उसका नशा लोगों के सिर पर और ज्यादा चढ़ रहा है।

बी सी सी आई द्वारा 2008 में शुरु किया गया इण्डियन प्रीमियर लीग सफलता और कीर्तिमानों की इन ऊँचाइयों को छुयेगा किसी ने सोचा नहीं था। 2013 में लागातार छठवीं बार आयोजित हो रहा आई पी एल निश्चित ही 2008 से ज्यादा सफलतापूर्वक आयोजित किया जा रहा है और बल्ले और गेंद की जंग का दर्शक खूब मजा ले रहे हैं। क्रिकेट की इस नई परिभाषा से पारंपरिक खेल का रोना रोने वाले क्रिकेटर और आलोचक भौंचक है। लेकिन जिस प्रकार फिल्मे, आलोचक या फिर निर्देशक निर्माता नहीं बल्कि दर्शक चलाते या डुबातें है, उसी प्रकार क्रिकेट का भविष्य आजकल दर्शक ही तय कर रहे हैं। पारंपरिक खेल से लोगों का नाता टूट रहा है और लोग रोमांच की पराकाष्ठा की ओर भाग रहे हैं।


डर्टी पिक्चर में विद्या बालन द्वारा बोला गया डायलाग कि, फिल्मे सिर्फ तीन चीजों से चलती है- इण्टरटेनमेन्ट, इण्टरटेनमेन्ट और इण्टरटेनमेन्ट। उसी प्रकार क्रिकेट भी आजकल सिर्फ तीन चीजों की वजह से देखा जाता है- इण्टरटेनमेन्ट, इण्टरटेनमेन्ट और इण्टरटेनमेन्ट। आई पी एल में इण्टरटेनमेन्ट है, रोमांच का तड़का है, चीयर लीडर्स की रिझाने वाली अदायें हैं। दर्शकों को इससे ज्यादा और क्या चाहिये। भागदौड़ भरी जिन्दगी में कुछ घण्टे वे अपनी परेशानियों को भूलकर ग्लेडियेटर्स की तरह लड़ रहे क्रिकेटरों को देखकर अपना मन बहला लेते हैं तो क्या बुरा है। 





दिल से निकलेगी ना मरकर  भी, वतन की उल्फत
मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आयेगी।।

Sunday, April 21, 2013

बारिश 2013


कई दिनों के इन्तजार के बाद आखिरकार बादलों को रहम आ ही गया और 2013 सीजन की पहली बारिश 20 अप्रैल की रात को हो गई। अभी इस समय जबकि शाम के तीन बज रहे हैं पिछले चार पाँच घण्टों से बारिश लागातार हो रही है। मौसम बहुत सुहावना हो गया है। लेकिन इसी बीच मेरे लिये काम बढ़ भी गया है। घर के बगल में लगाई हुई भिण्डियाँ जो बहुत तेजी के साथ बढ़ रही थीं, लेकिन अभी छोटी ही थीं, बारिश की वजह से गिर चुकी हैं।
कुछ दिनों पहले से ही पुरुवा हवाओं ने सूरज की तपन को बहुत कुछ नियंत्रित कर रखा था और रात में बिजली की चमक भी दिखाई दे जा रही थी। मानसून के पहले की इस तरह की बारिश को आम्र वर्षा कहते हैं।


दिल से निकलगी, ना मरकर भी, वतन की उल्फत मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आयेगी....।

Friday, February 1, 2013

कमल हासन की धमकी



काफी समय पहले जब मै हाईस्कूल का छात्र था तब मैनें अंग्रेजी के पाठ्यक्रम में रूल्स आफ द रोड नाम के अध्याय के अन्तर्गत एक छोटी सी कहानी पढ़ी थी जिसका सारांश था कि स्वतंत्रता का  मतलब निरंकुश होना नही बल्कि दूसरे की स्वतंत्रता का सम्मान करना है। कहानी को यहाँ संक्षेप में प्रस्तुत करना प्रासंगिक है। एक आदमी सड़क पर अपनी छड़ी घुमाते हुये चल रहा था। पीछे चलने वाले आदमी ने उसे टोका तो उसने जवाब दिया- मैं अपनी मर्जी से कोई भी काम करने के लिये स्वतंत्र हूँ। तब पीछे चलने वाले आदमी ने कहा- तुम्हारी स्वतंत्रता वहीं पर खत्म हो जाती है जहाँ पर मेरी नाक शुरू होती है। जिस बात को हाईस्कूल में इस कहानी के माध्यम से मेरे जैसे बहुत लोगों मे समझ लिया होगा कमल हासन जैसे लोग आज तक नहीं समझ पाये, लेकिन इससे यह साबित नही होता कि कि कमल हासन समझदार नही हैं। असल में वे समझदार भी हैं और एक दूरदर्शी फिल्म निर्माता भी जो जोखिम लेना चाहता है। कमल हासन के खाते में कुछ ऐसी फिल्मे हैं जो उन्हे विश्वस्तर के अभिनेता के रूप में स्थापित करती हैं। नायकन, हिन्दुस्तानी, सदमा, हे राम, दशावतार इत्यादि ऐसी फिल्में हें जिनसे किसी भी भारतीय अभिनेता को जलन हो सकती है। तो क्या वजह है कि कमल हसन जैसा संवेदनशील निर्माता अपनी नई फिल्म विश्वरूप पर तमिलनाडु सरकार द्वारा रोक लगाये जाने की वजह से इतना परेशान हो गया कि उसे देश छोड़ देने की धमकी देनी पड़ गई। हालाँकि इसे धमकी के रूप मे लेना सही नही है, क्योंकि देश छोड़ने का निर्णय कि सी व्यक्ति का नितांत निजी मामला है। लेकिन कमल हासन का यह व्यक्तव्य इस मामले में महत्वपूर्ण हो जाता है कि उन्होने सेकुलरिज्म के नाम पर भारत को छोड़कर किसी ऐसे देश में जाने की बात कही जो धर्म निरपेक्ष हो और जहाँ मीडिया पर धर्म का प्रभाव ना हो।
पर्दे के पीछे-
कमल हासन ने अपनी नई महत्वाकांक्षी फिल्म विश्वरूप को बनाने में अपनी सारी संपत्ति गिरवी रख दी है। फिल्म के एक्शन दृश्यों को फिल्माने में अच्छा खासा बजट लागाया गया है और इसे हालीवुड फिल्मों के टक्कर का बनाने की पूरी कोशिश हुई है। कुछ सप्ताह पहले इसे थियेटर से पहले सेटेलाइट पर पे आन चैनल्स के जरिये दिखाने की व्यवस्था भी की गई थी। इससे कमल हासन को कितना फायदा हुआ, पता नहीं, क्योंकि मीडिया में इस बारे में कोई खबर नही थी। समस्या की शुरुआत तब हुई जब कुछ मुस्लिम संगठनों ने फिल्म में आपत्तिजनक सामग्री की दुहाई देकर तमिलनाडु सरकार द्वारा फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगवा दी। कमल कोर्ट गये और फिल्म के प्रदर्शन की तिथि टल गई। जब भी किसी फिल्म के प्रदर्शन की तारीख टलती है तो निर्माता की साँसे अटकनी शुरु हो जाती है क्योंकि एक समय के बाद जनता के मन से उसकी तस्वीर मिटने लगती है। अब फिल्म में ऐसा क्या है जिसकी वजह से तमिलनाडु सरकार ने उसके प्रदर्शन पर रोक लगा दी, यह तो वो ही जाने लेकिन इसकी वजह से कमल का नाराज होना स्वाभाविक तो है, लेकिन सही नही।
कमल हसन के तर्क-
कमल ने एम. एफ. हुसैन का नाम लिया और कहा कि इसी धार्मिक कट्टरता की वजह से एक विश्वविख्यात भारतीय पेन्टर को भारत से निर्वासित होकर किसी दूसरे देश में जाकर तनहाई में अंतिम साँसे लेनी पड़ी। इस संदर्भ में दो बातें महत्वपूर्ण है कि हुसैन ने जिस देश में शरण लिया वह धर्म निरपेक्ष तो कतई नहीं था और दूसरी कि हुसैन के निर्वासन के पीछे क्या कारण थे। हुसैन चर्चा में तब आये जब उन्होने हिन्दू देवियों की नग्न तस्वीरें बनाई और उसका व्यापक विरोध हुआ। हुसैन को मरते वक्त भी इस सवाल का जवाब देना मुश्किल रहा होगा कि यह किस प्रकार की कला और ऐस्थेटिक सेंस है जो किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाती हो, उसे अपमानित करती हो। कला का एकमात्र उद्देश्य प्रेम और भाईचारा होना चाहिये, ना कि वैमनस्य बढ़ाने का एक साधन। कमल को भी यह समझना चाहिये था कि किसी के जलते हुये घर पर अपनी रोटी सेंकना बुद्धिमानी नहीं कही जायेगी और इंसानियत तो बिल्कुल भी नहीं।
वैश्विक समस्या-
ऐसा नही है कि यह किसी स्थान, राज्य या राष्ट्र विशेष की समस्या हो और तत्कालीन परिस्थितियों की देन हो। डेनमार्क के एक कार्टूनिस्ट द्वारा मोहम्मद साहब का कार्टून बना देने के बाद जो तूफान मचा था उसे एक चर्च के पादरी द्वारा पवित्र कुरान के पन्नों को जला देने घटनाओं ने और ज्यादा बढ़ाया है। चाहे फ्रांस में स्त्रियों द्ववारा बुर्का पहनने पर लगी रोक हो, या अमेरिका के गुरुद्वारे में किसी अमेरिकी द्वारा गोलियाँ बरसाने की घटना रही हो, आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हमले की घटना रही हो या फिर अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराना रहा हो, इन सबको एक नजरिये से देखने की आवश्यकता है। समाधान के लिये समस्या के कारणों को दूर करना जरूरी है।
स्वतंत्रता का सम्मान जरूरी-
यह सही है कि भारतीय संविधान ने हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है और भारत को एक पंथ निरपेक्ष राष्ट्र माना है लेकिन जब यही स्वतंत्रता दूसरों को उकसाने का कार्य करने लगती है तो इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। भारत जैसे देश में, जहाँ भाषा, संस्कृति और धर्म के आधार पर जगह-जगह पर विभिन्नता देखने को मिलती है और जिसका इतिहास धार्मिक वैमनस्यता की घटनाओं से भरा पड़ा है, वहाँ पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल तलवार की धार पर चलने जैसा है। लाख कोशिशों के बाद भी धर्म नाम की भावना को इंसानी दिमाग से नहीं निकाला जा सकता, इसलिये महत्वपूर्ण है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इस्तेमाल      और व्यवहार में मध्यम मार्ग और आपसी सहिष्णुता का समावेश किया जाय।

दिल से निकलगी, ना मरकर भी, वतन की उल्फत मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आयेगी....।

Sunday, December 16, 2012

राशि और स्वभाव

मेष राशि: मेष राशि के व्यक्ति अत्यन्त ऊर्जावान होते हैं। लगतार कार्य करना इन्हें पसंद होता है। ये एक ही समय में कई कार्य करते हैं और किसी भी कार्य को पूरा नहीं कर पाते हैं, इसलिए एक समय में इनके कई काम अधूरे प़डे रहते हैं। ये जो भी कार्य शुरू करते हैं उसके तुरंत परिणाम की इच्छा करते हैं और ऎसा न होने पर कार्य को बीच में ही छो़ड देते हैं। आपके दिमाग में जल्दबाजी अधिक रहती है। किसी की कोई बात यदि आपको बुरी लग जाये तो आप तुरन्त नाराज हो जाते हैं, लेकिन मनाने पर तुरन्त मान भी जाते हैं। किसी बात पर बहुत देर तक स्थिर नहीं रह पाते हैं। जल्दी-जल्दी विचारों में परिवर्तन होता रहता है। खाना जल्दी-जल्दी खाते हैं। तीखा और मसालेदार भोजन अधिक पसन्द करते हैं। पानी भी कम पीते हैं। पानी अधिक पीने की आदत डालिए। अन्यथा पित्त संबंधी समस्याओं से परेशान होंगे। मेष राशि के व्यक्ति बहुत साहसी होते हैं, किसी भी कार्य को करने से घबराते नहीं हैं लेकिन साहस प्रदर्शन कई बार विचारवान नहीं होता, बस अचानक ही विरोध या हमले करने की प्रवृत्ति रखते हैं। जो लक्ष्य अपने लिये ठान लेते हैं, उन्हें पाने के लिए मेहनत भी करते हैं और उसे पा लेने के बाद ही चैन से बैठते हैं। आप बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी हैं और अपनी महत्वकांक्षा की पूर्ति के लिए प्रयास भी करते हैं। आपको अपने कार्यो में कोई भी रोक-टोक पसन्द नहीं होती है। 
आप स्वतन्त्रता से अपने कार्य करना चाहते हैं। आप किसी भी कार्य को शुरू करके नेतृत्व करना पसंद करते हैं, ना कि किसी और के प्रारंभ किये गये कार्य में समूह रूप में कार्य करना। जीवन में कितना भी कठिन समय क्यों न आ जाये, आप घबराते नहीं है। आप बिना पूर्व योजना के कार्य करते हैं और निर्णय लेते हैं, जल्दबाजी में लिए गये निर्णयों के कई बार खराब परिणाम भी आते हैं। आपको जो भी बात बुरी लगती है आप तुरन्त मुँह पर ही बोल देते हैं। किसी भी कार्य को सीखने या पाने की लगन आपमें होती है। अपने पास आये हर व्यक्ति की आप मदद करते हैं। आपमें आत्मविश्वास बहुत अधिक होता है। किसी भी कार्य की योजना पहले से ही आपके मस्तिष्क में रहती है लेकिन क्रियान्वयन के लिये समुचित योजना नहीं बनाते एवं उसके विभिन्न पहलुओं पर विचार नहीं करते।


वृषभ राशि: वृषभ राशि के व्यक्ति अत्यन्त सहन शक्ति वाले व कर्मठ होते हैं। यह किसी बात को जब तक सहन करते हैं, जब तक इनसे सहन किया जाता है, लेकिन जब कोई बात इनकी सहन करने की क्षमता से बाहर हो जाती है तो इनके अंदर का क्रोध का गुब्बार बाहर निकल प़डता है। ये व्यक्ति अत्यन्त मेहनती होते हैं। आप प्यार से कुछ भी करवा सकते हैं, लेकिन जबरदस्ती इनसे कुछ भी करवाना मुश्किल होता है। ये लगातार कई घंटों बिना थके काम कर सकते हैं।

हर सुन्दर वस्तु इन्हें अच्छी लगती है, अपने आसपास के वातावरण को व्यवस्थित रखना इन्हें पसंद होता है। अपने घर एवं ऑफिस में आधुनिक संसाधनों का ये उपयोग करते हैं। स्वयं का सजना-सँवरना भी इन्हें बहुत पसंद होता है। सोच-विचार करके योजनाबद्ध तरीके एवं पूर्ण लग्न से कार्य करते हैं। वृषभ राशि के व्यक्ति स्वभाव से, पर एक सीमा के बाद जिद्दी होते हैं अगर किसी बात पर ये अ़ड जाये तो फिर इनसे कुछ भी करवाना मुश्किल होता है। अपनी जिद के आगे ये यह भी नहीं सोचते हैं कि सामने वाला भी सही हो सकता है, जिसके बारे में ये अपने मन में जो छवि बना लेते हैं, उसे आसानी से नहीं बदलते हैं और यही स्वभाव इनके संबंधों को खराब करता है। 
ये व्यक्ति भविष्य को लेकर सदैव सकारात्मक सोच रखते हैं जैसे इनका स्वयं का नजरिया सकारात्मक होता है वैसे ही ये स्वयं से मिलने वाले निराश व्यक्ति के मन में भी आशा की किरण भर देते हैं। ये हर कार्य को मन लगाकर तथा पूरी लग्न से करते हैं लेकिन ये चाहते हैं कि इनके हर काम की प्रशंसा की जाये।
अपनी जिम्मेदारी को ये अच्छे से समझते हैं और उन्हें निभाते भी हैं। दूसरे की सहायता जी-जान से करते हैं। आप ऎश्वर्यशाली जीवन जीना पसंद करते हैं आप अपने जीवन को भरपूर जीते हैं। खान-पान में सात्विक भोजन ही पसंद करते हैं। आप सुख-सुविधाओं में रहना ही ज्यादा प्रसन्न रहते हैं। अभावग्रस्त जीवन जीने में आपको थो़डी समस्या आती है। आप अपनी परम्पराओं से बहुत अधिक जु़डे हुए होते हैं। आप अपनी परम्पराओं का पालन भी करते हैं और आधुनिक समाज के साथ भी चलते हैं। आपकी जीवनशैली आधुनिक समय के साथ ही बदलती रहती है।


मिथुन राशि: इनका मस्तिष्क सदैव गतिमान रहता है, प्रखर बुद्धि होती है। हर विषय को समझने की अद्भूत क्षमता होती है। कठिन से कठिन विषय को भी ये आसानी से समझ लेते हैं। अपनी बातों से आसानी से अपना काम ये निकलवा लेते हैं। इनकी वाणी अत्यंत प्रभावशाली होती है। आप मजाकिया स्वभाव के हैं, हमेशा खुश रहना एवं दूसरों को खुश रखना, वातावरण को खुशनुमा बनाये रखना आपके स्वभाव का विशेष गुण है। आपकी सामंजस्य स्थापित करने की क्षमता अद्भूत होती है। आप स्वयं को किसी भी माहौल में ढाल लेते हैं। हर उम्र के व्यक्ति के साथ रचनात्मक रूप से आप समय व्यतीत करते हैं, आपको कहीं कोई परेशानी नहीं होती है। आप बुद्धिमान है इसलिए योजनाएँ बनाते हैं और पूरा करने के लिए निष्ठा से कार्य भी करते हैं। आप खाली नहीं बैठ सकते हैं। हर समय कुछ ना कुछ करना आपका स्वभाव है। सी भी समस्या से घबराते नहीं है, बल्कि बुद्धिमत्ता से उसका समाधान निकालते हैं। 

मिथुन राशि द्विस्वभाव राशि है। यही लचीलापन आपके स्वभाव में स्प्ष्ट दिखाई देता है। जरूरत के अनुसार आप अपने को ढ़ाल लेते हैं व किसी से भी अच्छे संबंध बना लेते हैं। जिन लोगों को पसंद और जिन लोगों को नापसंद करते हैं आपके उनके साथ भी अच्छे संबंध होते हैं। आप मानसिक कार्य अच्छे से करते हैं। द्विस्वभाव राशि होने से आपके स्वभाव में स्थिरता व चलायमान व्यवहार का सुन्दर समन्वय होता है। वायु की भांति हर जगह विद्यमान रहना व एक जगह ना टिककर बैठने की आपकी प्रवृत्ति होती है। मिथुन राशि के जातक बुद्धिमान होते हैं इसलिए हर क्षेत्र का ज्ञान इन्हें होता है, अलग-अलग क्षेत्रों में ये प्रसिद्धि पाते हैं। मिथुन राशि के जातक अकेले नहीं रह पाते हैं, इन्हें एक दोस्त की कमी हमेशा महसूस होती है। एक बालक की ही भाँति हर चीज को सीखने एवं पाने की ललक आप में होती है। हर व्यक्ति का ध्यान आपकी ओर रहे यही आपकी इच्छा होती है।

कर्क राशि: चर राशि है इसलिए हर समय चलायमान रहना एवं किसी न किसी नये कार्य से जु़डे रहना इनका स्वभाव है। ये लगातार कई घंटों तक कार्य करते हैं, जिसका बुरा प्रभाव इनके स्वास्थ्य पर भी प़डता है। चन्द्रमा का प्रभाव राशि पर होने के कारण आप अत्यधिक भावुक होते हैं। हर व्यक्ति से आप स्नेह करते हैं। जिनके साथ आपका लगाव अत्यधिक होता है उनके लिए आप कुछ भी करने को तैयार रहते हैं और जिनके साथ आपकी शत्रुता हो उनको नुकसान पहुंचाने के लिए भी आप किसी हद तक जा सकते हो। आप जिनसे जु़डे होते हैं, उन्हीं की बात सुनना पसंद करते हैं, लेकिन वह गलत भी हो सकता है। इसी वजह से आपके निर्णय एक तरफा हो जाते हैं एवं कई बार गलत भी हो जाते हैं। हर बात को जानने - सीखने की इनकी जिज्ञासा प्रबल रहती है। गीत, संगीत के शौकीन होते हैं। 

आप जीवन को ऎश्वर्यपूर्ण तरीके से जीते हैं, लेकिन फालतू खर्चा नहीं करते हैं इसलिए कई बार कंजूस भी कहलाते हैं। कर्क राशि वाले व्यक्तियों को जल के नजदीक रहना अच्छा लगता है। 
आपको प्रकृति (नेचर)के निकट रहना भी पसंद होता है। जल संबंधी व्यवसाय/शिक्षा भी इस प्रकार के जातक के लिये उपयुक्त है। खान-पान में आपको ठण़्डी एवं जलीय वस्तुओं का सेवना करना पसंद होता है। ठण़्डी वस्तुओं के अधिक सेवन से आपको कफ संबंधी समस्याओं का सामना करना प़डता है। 
आपको ठण्ड से परहेज एवं अपने भोजन में गर्म वस्तुओं का सेवन अधिक करना चाहिए। आपके जीवन में अचानक किसी घटना से परिवर्तन आता है क्योंकि समय होने पर तो कर्क राशि वाले जातक कार्य को लेकर गंभीर नहीं होते, लेकिन जब आवश्यकता प़डती है और समय खत्म होता है तो ये कार्य को पूर्ण करने में जुट जाते हैं। 


सिंह राशि आपका स्वभाव स्थिरता लिये हुये होता है। आप आत्मविश्वास से पूर्ण रहते हैं। जो भी कार्य करते हैं, उसे अन्त तक पूरे उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ करते हैं। आपको शारीरिक कार्य से अधिक मानसिक कार्य करना पसंद होता है। राशि स्वामी सूर्य जोकि ग्रहों के राजा कहलाते हैं इन्हीं के अनुसार इन जातकों का स्वभाव होता है, ये नीतियाँ बनाते हैं और उन पर लोगों से कार्य करवाते भी हैं और स्वयं भी उनका पालन करते हैं। किसी भी कार्य में अनुशासनहीनता इन्हें पसंद नहीं होती है। स्वभाव से ये बहुत ही अनुशासनप्रिय होते हैं, जरा सी भी गलती इन्हें पसंद नहीं अथवा बर्दास्त नहीं होती है।

इस स्थिति में जब इन्हें क्रोध आता है तो उसे रोक पाना मुश्किल होता है। इन्हें वनों एवं पर्वतों पर घूमना पसंद होता है। जो बात कहते हैं, उस पर स्थिर रहते हैं। उच्चा स्तर के कार्य करना आपको पसंद होता है। अपने बराबर के स्तर के लोगों के साथ ही उठना-बैठना आप पसंद करते हैं। कार्य कोई भी हो सिंह राशि के जातक घबराते नहीं है, उन्हें ये विश्वास होता है कि ये इसे अच्छे से कर लेंगे और ये ऎसा ही करते हैं। ये सबके प्रति दयालु होते हैं किसी को कोई भी कष्ट हो उसकी मदद के लिये ये हमेशा तैयार रहते हैं। सबको संरक्षण देना इनका स्वभाव है। संगीत एवं साहित्य के ये प्रेमी होते हैं। ये अत्यंत महत्वाकांक्षी होते हैं। अपनी महत्वकाक्षाओं की पूर्ति के लिए आवश्यक मेहनत भी करते हैं। अपने लक्ष्यों की प्राçप्त के लिए पूरी लग्न से कार्य करते हैं। सिंह राशि के जातक ऎसे तो किसी को कुछ नहीं कहते हैं लेकिन कोई इन्हें छे़डे, तो उसे ये छो़डते नहीं है। खान-पान में तीखा एवं राजसिक भोजन ही पसंद करते हैं। पानी कम पीते हैं। अधिक तीखा भोजन नुकसान देता है इसलिए थो़डा, सादा भोजन एवं पानी की मात्रा बढ़ायें। सिंह राशि के जातकों को किसी का भी किया गया कार्य जल्दी से पसंद नहीं आता है। जल्दी से किसी की भी बात से सहमत नहीं होते हैं। 

कन्या राशि : कन्या राशि के व्यक्ति सभी को साथ लेकर चलते हैं। सभी को खुश रखने का प्रयास करते हैं, जिसमें कई लोग इनसे नाराज हो जाते हैं। ये सबकी बातें सुनते हैं और सहन करते हैं, जब तक सहा जाये, सहते हैं, लेकिन अति होने पर जब क्रोधित होते हैं और बोलते हैं, तो इन्हें रोक पाना मुश्किल होता है। हर बात को गुप्त रखने की आपकी आदत होती है। आपसे यदि कोई बात की जाये तो वो आप तक ही सीमित रहती है। आप सबकी तकलीफ सुनते हैं और उसका समाधान भी करते हैं। लेकिन जब स्वयं को कोई तकलीफ होती है तो उसे किसी से नहीं कहते हैं। कोई कष्ट, कोई परेशानी हो तो सहन करते रहते हैं और जब सहनशीलता से बात ऊपर हो जाती है तो फिर आप किसी की परवाह नहीं करते हैं। राशि के स्वामी बुध होने से आप अत्यंत बुद्धिमान एवं कोमल स्वभाव के होते हैं। 

आपके स्वभाव एवं व्यवहार से कोई भी व्यक्ति आपकी ओर आसानी से आकर्षित हो जाता है एवं आपकी बातों से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता है। अपनी वाणी के कौशल से आप मुश्किल से मुश्किल कार्य भी आसानी से बना लेते हैं, बोझिल वातावरण को भी हल्का-फुल्का बना देते हैं। बुध का प्रभाव होने से आप कई बार घर एवं परिवार के बीच बच्चों जैसी हरकते करते हैं और सब का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। लेकिन कई बार छोटे बच्चो की ही तरह जिद्दी भी हो जाते हैं। आपका मस्तिष्क चंचल होता है इसलिये अपने आसपास के वातावरण को खुशनुमा बनाये रखने में आपका पूरा-पूरा सहयोग रहता है। आप स्वयं को किसी भी वातावरण में आसानी से ढाल लेते हैं। कठिन से कठिन समय आने पर भी आप बिल्कुल नहीं घबराते हैं तथा उनका समाधान खोज ही लेते हैं और यही बात आपको औरों से अलग एवं साधारण से खास बनाती है। आपका मस्तिष्क सदैव गतिमान रहता है इसलिए आप किसी न किसी महत्वपूर्ण विषय पर योजनाएँ बनाते रहते हैं और उन पर कार्य करते रहते हैं।

तुला राशि: तुला राशि का जातक अपने रिश्तों, कारोबार और अपने संबंधों में सामंजस्य स्थापित किये रहता है। उसे किसी व्यक्ति से कोई शिकायत नहीं होती और जिससे मिलता है, उसके साथ उसी तरह का व्यवहार अपनाते हैं। ऎसे व्यक्ति थो़डे चंचल होते हैं और अच्छे व्यावसायिक साबित होते हैं। चीजों की खरीददारी में पैसे बचाना इन्हें बखूबी आता है। धैर्य और संयम से निर्णय लेते हैं और कार्य करते हैं। राजा के समान रहना अनुशासनात्मक जीवन इन्हें पसंद है। उन्हीं की तरह खान-पान, रहना, भोग-विलास की चीजों का इस्तेमाल करना इनकी दिनचर्या में शामिल होता है। ये लोग घूमने के बहुत शौकीन होते हैं। अपने विषय से हटकर कार्य करना इन्हें पसंद होता है। ऎसे व्यक्ति बहुत रचनात्मक होते हैं, गाने सुनना, गायन, वादन, नृत्य, कुकिंग, मेटिंग, एक्टिंग के क्षेत्र में अच्छा करते हैं।

इनके पहनावे और रहन-सहन को देखकर लोग आसानी से इनकी ओर आकर्षित हो जाते हैं और इनसे दोस्ती करना चाहते हैं। ऎसे व्यक्ति हास्य पसंद और खुश रहना और खुशी बांटना इनकी आदत होती है। ऎसे व्यक्ति अच्छे वक्ता और श्रोता साबित होते हैं। इन्हें अपनी तारीफ सुनना पसंद होता है। इन्हें फिजूल समय व्यतीत करना अच्छा नहीं लगता और जब भी समय मिलता है तो ये अपने शौक को पूरा करने के लिए जुट जाते हैं। 
एक से अधिक विषयों में इनकी रूचि होती है और सभी में अच्छा करने का प्रयास करते हैं। साहित्य में रूचि होने के कारण इनकी लेखन क्षमता भी अच्छी होती है और कभी-कभी लेखन से संबंधित कार्य भी करते हैं। अपने परिवार की जरूरतें पूरी करना और उनके साथ बिताने का मौका ये लोग कभी नहीं छो़डते। अपनी उम्र से छोटे दिखाई देते हैं और जहां भी जाते हैं वहाँ का माहौल रंगीन करना इनकी आदत होती हैं। इन्हें अधिक तला-भुना और मसालेदार खाने से बचना चाहिए अन्यथा नुकसानदेय सिद्ध हो सकता है। निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें।


वृश्चिक राशि: ऎसे व्यक्ति आसानी से अपने निर्णयों को नहीं बदलते। इनके जीवन और कार्यो में स्थायित्व होता है व स्वभाव से थो़डे से जिद्दी होते हैं। परन्तु कभी-कभी गलत बातें पर इनकी जिद्द घातक साबित होती है।

इन्हें अपनी इस आदत को बदलने का प्रयास करना है। इनके द्वारा लिये गये निर्णय जल्दी से नहीं बदलते। ये लोग कुछ भी भूलते नहीं और समय आने पर पर अपना बदला जरूर लेते हैं। ये लोग अपनी कार्यप्रणाली पर विशेष ध्यान रखते हैं। ऎसे व्यक्ति साहसी, पराक्रमी और निडर होते हैं। जिसका परित्याग ये समय-समय पर देते हैं। ऎसे व्यक्ति बहुत ऊर्जावान होते हैं। अगर इनकी ऊर्जा को सकारात्मक चीजों में लगा दी जाए तो ये लोग बहुत अच्छे पद पर पहुंच सकते हैं। ऎसे व्यक्ति पुलिस, सेना में जाने की चाह रखते हैं। ऎसे व्यक्ति परिणाम का इन्तजार लम्बे समय तक कर सकते हैं। इन्हें अधिक तला भुना, मसालेदार या अधिक समय तक भूखा नहीं रहना चाहिए, अन्यथा गैस या पित्त संबंधी परेशानी हो सकती है। अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें और पानी का सेवन बढ़ाने का प्रयास करें और भोजन समय पर करें। हर बात को अपने आत्म-सम्मान के साथ न जो़डे और दूसरों को समझने का प्रयास करना चाहिये। इन्हें बहुत जल्दी क्रोध नहीं आता और इन्हें समझाना थो़डा-सा मुश्किल होता है। इनके दिमाग में कुछ चल रहा है और ये सामने कैसे रिएक्ट कर रहे हैं, ये सिर्फ स्वयं ही जानते हैं। ये अपने शत्रुओं को पूरी रणनीति बनाकर खत्म करते हैं और अपनी गलती भी मान लेते हैं। इन्हें अपने क्रोध पर नियंत्रण रखने का प्रयास करना चाहिए व मानसिक अन्र्तद्वन्द्व से बचे। इस राशि के बच्चों को पहले ही किसी सही दिशा की ओर अग्रसर करें। जिससे उनकी ऊर्जा को सकारात्मक रूप मिल सके। 

धनु राशि: धनु राशि के जातक आध्यात्म, साहित्य, धर्म तथा शिक्षा के क्षेत्र से जु़डे हुए मिलते हैं। ऎसे व्यक्ति यथार्थवादी होते हैं। हमेशा किसी न किसी कार्य में व्यस्त रहते हैं। उन्हें खाली बैठना पसंद नहीं होता है। अपने लक्ष्य के प्रति सचेत रहते हैं। सबका ध्यान रखना इनकी विशेषता होती है। ये लोग साहसी और निडर होते हैं। परन्तु भगवान से डरने वाले होते हैं। आप गम्भीर स्वभाव के हैं और रूढि़वादी होने के कारण परम्परा और परिवार को अधिक महžव देते हैं। दूसरो को सलाह देना और मदद करना आपका मुख्य गुण है। दूसरो की मदद करते-करते कभी-कभी आप अपना नुकसान भी कर बैठते हैं। जिस कारण परिवार की नाराजगी भी सहन करनी प़डती है। सकारात्मक सोच के साथ कार्य करना पसंद है। मान-सम्मान अधिक प्रिय है, जिसके लिए कभी भी कोई समझौता नहीं करते। ज्ञान अर्पित करना और ज्ञान बाँटना पसन्द है। मार्गदर्शन करने में कभी भी पीछे नहीं हटते हैं। अपनी उम्र से ब़डी बातें करना अच्छा लगता है। 

आशावादी रहते हैं और धार्मिक कार्यो में लगे रहते हैं। चुपचाप बैठे रहते हैं और सबकी सुनते हैं। परन्तु जब प्रतिक्रिया करने की आवश्यकता महसूस हो, तभी करते हैं। ज्ञान अर्जित करने के लिए कोई भी जोखिम ले सकते हैं। नये प्रयोग और खोज करना इनकी आदत होती है। कभी-कभी इतने क्रूर हो जाते हैं कि किसी को जलाकर भस्म करने की क्षमता भी इनमें होती है। धनुष से निकले तीर कई तरह से, एक बार ढान लेने के बाद किसी की सुनते नहीं व जो मन में है, उसको करते हैं। यह न्यायप्रिय और ईमानदार होते हैं। अनेक भाषाएँ, गुप्त रहस्य विद्याएँ और दर्शन शास्त्र के भी ज्ञाता होते हैं। किसी भी कार्य को कर सकते हैं और अपनी योग्यता पर पूरा विश्वास होता है। कार्यो को समय पर पूरा करते हैं। दूसरो पर भरोसा करके निर्णय लेते हैं और सभी के हितैषी और मित्र बने रहना इन्हें अच्छा लगता है।

मकर राशि : मकर राशि के जातक स्वभाव से आलसी होते हैं, परन्तु अगर मन में दृढ़ निश्चय कर ले कि लक्ष्य हासिल करना ही है तो अपनी पूरी मेहनत और लगA से कार्य करते हैं। एकाग्रचित्त होकर कार्य करते हैं। ऎसे व्यक्ति महत्वकांक्षी होते हैं। धीरे-धीरे धैर्य और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते रहते हैं और इन्हें सफलता धीरे-धीरे मिलती है। जिस कारण ये कभी-कभी निराश भी हो जाते हैं। इन्हें धैर्य और संयम बनाये रखना चाहिए। अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए धन खर्च कर देते हैं और धन नहीं बचा पाते। स्वाभिमानी होने के कारण जल्दी से किसी की मदद नहीं ले पाते हैं। ये बिना रूके निरन्तर कार्यो में अग्रसर रहते हैं। सफलता देर से मिलती है। ऎसे व्यक्ति यथार्थवादी होते हैं, कठोर परिश्रमी होते हैं और ज्यादातर नौकरी करते हुए मिलते हैं। अनुशासनहीनता इन्हें बिल्कुल पसंद नहीं होती इसके लिए किसी का भी विरोध करने से नहीं चूकते। मानसिक परिश्रम, शारीरिक परिश्रम अधिक करते हैं। दूसरों को प्रेरणा देने का कार्य करते हैं। आध्यात्म से जु़डे रहते हैं। अपने बनाये हुए सिद्धान्तों का पालन करते और करवाते हैं। गलत बातों का विरोध सामने रहकर करते हैं, फिर अकेले ही क्यों ना हो। इन्हें अपने क्रोध पर नियंत्रण रखकर कार्य करना चाहिए और ज्यादा आलोचना नहीं करनी चाहिए। ऎसे व्यक्ति एकाधिकार चाहते हैं, जिसके लिए ये किसी की भी नहीं सुनते और अपने कार्यो में लगे रहते हैं। कभी-कभी ऎसा करना नुकसानदायक सिद्ध होता है। अपने से ज्यादा किसी पर विश्वास न कर पाने की वजह से इनके ज्यादा मित्रगण नहीं बन पाते हैं। परन्तु ये चंचल और शान्त स्वभाव के भी होते हैं। कठोर व्यवहार करना इनकी आदत होती है।

कुंभ राशि: ऎसे व्यक्तियों को बिना रूके कार्य करना तथा किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप पसंद नहीं होता है। इनके जीवन में ठहराव होता है। जल्दी से अपनी कार्यप्रणाली और आदतें परिवर्तित नहीं कर पाते। ऎसे व्यक्तियों के मित्र होते हैं और समूह में अच्छा कार्य करते हैं, परन्तु किसी से खुलकर बात नहीं कर पाते। ये थो़डे शर्मीले होते हैं। इसलिए अच्छे लेखक तो बन सकते हैं, परन्तु अच्छे वक्ता नहीं बन पाते। इन्हें खुलकर बात कहने का प्रयास करना चाहिए। विषयों की गहराई में जाकर सोचते हैं इसलिए नये प्रयोग और खोज करना इनकी मुख्य विशेषता होती है। सादगी और सरलता से कार्य करते हैं। व्यवहवार में कुशलता बनाये रखते हैं परन्तु जब क्रोध आता है तो जल्दी से शान्त नहीं हो पाते। कठोर परिश्रमी होते हैं, सफलता भी मिलती है। अपनी योग्यता को साबित करने के लिए अपनी पूरी मेहनत लगा देते हैं। अपने बनाए हुए सिद्धान्तों पर चलना इन्हें पसंद होता है। स्वयं तो उस पर चलते हैं और दूसरों से भी अमल कराते हैं। अपने किए हुए कार्यो का श्रेय लेने से भी बचते हैं। आध्यात्म के प्रति इनका रूझान होता है। दानी और उदार होते हैं। 

अनुशासनहीनता इन्हें पसंद नहीं आती और दण्ड देने से भी नहीं चूकते हैं। न्यायप्रिय होते हैं। स्वाभिमान कब अहम में बदल जाता है उन्हें खुद भी पता नहीं चलता। इसलिए इन्हें ऎसा करने से बचना चाहिए। परिणाम धीरे-धीरे मिलते हैं परन्तु धैर्य और संयम से कार्य करते हैं। लक्ष्य प्राçप्त के लिए प्रेरित करते हैं। शारीरिक श्रम कर लेते हैं, लेकिन मानसिक श्रम अधिक नहीं कर पाते। वातावरण को अपने अनुकूल बनाना इन्हें बखूबी आता है। सबको प्रसन्न रखना इनकी मुख्य आदत होती है। व्यवहार में नम्रता रखते हैं। परन्तु क्रोध आने पर सब भूल जाते हैं। संयम बनाये रखने का प्रयास करें। 

मीन राशि: ऎसे जातक उदारमन और परोपरकारी होते हैं। चंचलता व्यवहार का लचीलापन) हमेेशा बनी रहेगी, बच्चों के साथ बच्चो और ब़डों के साथ ब़डे बन जाते हैं। स्वभाव से शान्त दिखते हैं, परन्तु क्रोध आने पर स्वयं को रोक नहीं पाते। आध्यात्म और शिक्षा के क्षेत्रों से जु़डे हुए मिलते हैं। ज्ञाता होते हैं और अच्छे सलाहकार सिद्ध होते हैं। ईमानदारी से कार्य करते हैं। भावनात्मक तरीके से लोगों से जु़डे होने के कारण सम्मान मिलता है। पारम्परिक दृष्टिकोण से समझौता नहीं कर पाते। उच्चाकोटि की कल्पनाशील होते हैं और काव्य, साहित्य के प्रति विशेष रूचि दिखाते हैं, जिसके साथ या जैसे माहौल में रहते हैं, उसी के तरह बन जाते हैं। गम्भीर रहकर सोचते और बातें करना इन्हें पसंद होता है। ऎसे व्यक्ति अच्छे श्रोता और वक्ता साबित होते हैं। कार्यो में किसी प्रकार का समझौता पसंद नहीं होता।

 इनकी सोच और कार्यो में हमेशा नवीनता मिलती है। ईश्वर पर बहुत विश्वास रखते हैं। उसी कारण कभी किसी छल या कपट नहीं कर पाते और ईश्वर से डरते हैं। दर्शनशास्त्र इन्हें पसंद होता है। किसी बात को बहुत सरलता और अच्छी तरह से समझाते हैं। गुरूओं की भांति इनका स्वभाव होता है और स्वतंत्रता पसंद होती है परन्तु परिवार से दूर नहीं रह पाते और अपनी ज़डों को नहीं छो़डते। अकसर ये लोग अपने पारिवारिक व्यवसायों को आगे बढ़ाते हुए मिल जाते हैं। उत्साहित होकर कार्य करते हैं और किसी भी बाधा का डटकर सामना करते हैं। समय-समय पर अपनी योग्यता का परिचय देते रहते हैं। सम्मान को हमेशा बनाये रखने का प्रयास करते हैं। सभी के प्रति एक समान व्यवहार रखते हैं। प्रेम और दया का भाव इनके मन में हमेशा रहता है।


दिल से निकलगी, ना मरकर भी, वतन की उल्फत मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आयेगी....।

Monday, September 17, 2012

बारिश


पिछले कई दिनों से लागातार बारिश हो रही है। मुझे याद है कि ऐसी बारिश अगस्त में हुआ करती थी। लेकिन मौसम में बदलाव और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से मौसम पेटियों में खिसकाव हो रहा है। 
कल फैजाबाद से एक दोस्त का फोन आया कि मौसम बहुत आशिकाना है, सोचा कि तुम्हे फोन कल लिया जाय। अपने कालेज के दौरान ऐसे मौसम में हम बहुत मजे किया करते थे। वाकई इस तरह का मौसस मजे करने के लिये ही होता है। बादल पूरे उत्तर भारत के आकाश में छाये हुये हैं और जल्दी जायेंगे, कुछ कहा भी नही सकता। लेकिन इन सब के बीच धान की फसल के लिये यह बारिश वरदान की तरह है। 
इस साल अगस्त का महीना बारिश के लिहाज से काफी सूखा रहा। पूरे महीने उमस और गर्मी की वजह से आम आदमी तड़पता रहा क्योंकि महराजगंज जैसे छोटे कस्बे में बिजली की सप्लाई का भगवान ही मालिक है और भगवान ने ही बारिश से वंचित कर दिया इसलिये आम जनता को काफी परेशानी हुई। लेकिन सितंबर का महीना काफी राहत लेकर आया। खासकर पिछला सप्ताह जिसमें रुक रुककर हल्की बारिश होती रही। 



दिल से निकलगी, ना मरकर भी, वतन की उल्फत मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आयेगी....।

मतदान स्थल और एक हेडमास्टर कहानी   जैसा कि आम धारणा है, वस्तुतः जो धारणा बनवायी गयी है।   चुनाव में प्रतिभागिता सुनिश्चित कराने एवं लो...